अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सवः हिंदी तकनीक की नई दिशाओं पर सार्थक विमर्श
 
- बालेन्दु शर्मा दाधीच
साहित्य सेवी संस्था अक्षरम हर वर्ष कुछ अन्य हिंदी सेवी संस्थानों के साथ मिलकर नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव का आयोजन करती है। राजधानी में हिंदी के साहित्यिक कैलेंडर में यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है जिसमें साहित्य की प्रधानता तो अवश्य रहती है किंतु हिंदी के विविध पक्षों पर भी गंभीर विमर्श का प्रयास होता है। सूचना प्रौद्योगिकी भी इनमें से एक है, जिसे इस वर्ष (2013) के अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव की मुख्य थीम बनाया गया था।

उद्घाटन सत्र के बाद हिन्दी प्रौद्योगिकी पर आधारित सत्र का आयोजन हुआ। सत्र के प्रधान विषय में ईबुक नामक उभरती हुई साहित्यिक-तकनीकी क्रांति थी, किंतु मोटे तौर पर हिंदी के नए तकनीकी आयामों पर ध्यान केंद्रित किया जाना था।

मैंने अपने बीज वक्तव्य में ईबुक्स के तकनीकी, साहित्यिक और कारोबारी पहलुओं पर बुनियादी जानकारी देने का प्रयास किया। मेरे वक्तव्य का सार संक्षेप यह था कि ऐसे समय पर जबकि इंटरनेट और टेलीविजन के दबाव में पढ़ने लिखने की प्रवृत्ति संकट में है, ईबुक्स ने किताबों को पाठकों तक पहुँचाने का वैकल्पिक जरिया उपलब्ध कराया है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। ईबुक्स नए जमाने की पसंद के अनुरूप, बहुत सुविधाजनक, सस्ता माध्यम है और इसके प्रसार के लिए संभावनाएँ अनन्त हैं। जरूरी है कि हिंदी के लेखक और प्रकाशक भी तकनीक को अपनाएँ और ईबुक्स के जरिए नए पाठक वर्ग तक तो पहुँचें ही, कारोबार के लिहाज से भी लाभान्वित हों।
मेरे वक्तव्य का एक अंशः
"जब अस्तित्व का संकट खड़ा होता है तो चीजें अपने आपको पुनर्जीवित करने की जोरदार कोशिश करती हैं। तब वे अपनी सारी ताकत इकट्ठी करके और बहुत कुछ नया सीखकर खुद को प्रासंगिक बनाने की जद्दोजहद में जुटती हैं। चाहे वे भाषाएँ हों, रुचियाँ हों, या फिर अच्छी आदतें। किताबों ने भी अपने-आपको पुनर्परिभाषित, नए सिरे से पेश किया है। यह अपना अस्तित्व बचाने की किताब की जिजीविषा है जो ई-बुक के रूप में सामने आई है। यह अपना महत्व, अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की उसकी अद्वितीय कोशिश है।

"लेखकों, कवियों, प्रकाशकों, पाठकों, शिक्षकों, छात्रों, पत्रकारों, विद्वानों, तकनीकविदों, भाषाविदों, कोशकारों और आम लोगों को भी इस तकनीकी परिघटना को समझना है। हममें से हर एक के लिए इसमें कुछ न कुछ मौजूद है। लेखक अपने प्रकाशकीय बाधाओं और उबाऊ इंतजार से मुक्त हो सकते हैं क्योंकि ईबुक का निर्माण मुद्रित किताब की अपेक्षा दसवाँ हिस्सा मात्र है और बाजार दस गुना ज्यादा बड़ा। छात्रों के लिए उच्च कोटि की पुस्तकों को सस्ती दरों पर डाउनलोड करने का अवसर है और संस्थानों के लिए अपनी सूचनाओं का आसान डॉक्यूमेंटेशन करने की सुविधा। जरूरी नहीं कि आप किताब के लिए कुछ महीने या कुछ साल काम करें। यदि आपने पाँच अच्छे लेख और बीस अच्छी कविताएँ लिखी हैं तो उनकी भी ई-बुक संभव है क्योंकि यहाँ पुस्तक की मोटाई कोई पैमाना नहीं है। वह होना भी नहीं चाहिए। लोकप्रियता का अगर कोई पैमाना है तो वह है- विषय वस्तु। वह जितना समृद्ध, नया, दिलचस्प, गहरा और दमदार होगा, ईबुक की सफलता के आसार उतने ही बढ़ जाएँगे।

ईबुक्स का सौंदर्य यह है कि उन्होंने पाठक और किताब के बीच मौजूद तमाम दीवारें खत्म कर दी हैं। पाठक सीधे किताब तक पहुँचता है और डाउनलोड कर लेता है। लेखक और पाठक दोनों के लिए इससे अच्छा और क्या होगा?"

सत्र का संचालन करते हुए प्रो. राजेश कुमार ने हिन्दी के विकास में प्रौद्योगिकी के योगदान को रेखांकित करते हुए हिन्दी के क्षेत्र में विभिन्न संभावनाओं का उल्लेख किया।

सत्र के अध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रधर ने कहा की हिन्दी भाषा के क्षेत्र में विभिन्न मांगों की पूर्ति प्रौद्योगिकी कर सकती है। उन्होने कहा कि हिन्दी के विकास के लिए बहुमुखी प्रयासों और उनके एकीकरण की अत्यधिक आवश्यकता है।

इसी प्रसंग को आगे बढाते हुए सी-डैक के ग्रुप कोऔडिनेटर श्री जसजीत सिंह ने भारतीय भाषाओं के सी-डैक द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न उपकरणों की झलक पेश की।

श्री चन्द्र मोहन रावल ने अनुवाद के क्षेत्र में उपलब्ध कंप्यूटर सहायक उपकरणों – कैट टूल की उपयोगिता की चर्चा की। अंत में मनु इंफोसौलूशंस के सीईओ भारत भूषण ने ब्लॉग प्रकाशित करने और उसके डिजाइन पर व्यावहारिक प्रस्तुति की।
 

 
झलक चित्रों में
बालेन्दु शर्मा दाधीच ईबुक्स पर केंद्रित सत्र को संबोधित करते हुए।
बालेन्दु शर्मा दाधीच ईबुक्स पर केंद्रित सत्र को संबोधित करते हुए।

 

 

आयोजन एक नज़र में
कार्यक्रमःअंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव
विषयःहिंदी प्रौद्योगिकी के नए आयाम
आयोजकःअक्षरम तथा अन्य हिंदी सेवी संस्थाएँ
स्थानःदिल्ली का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हिंदी आयोजन
दिनांकः9 फ़रवरी 2013
विशेषःआज़ाद भवन सभागार, आईसीसीआर, नई दिल्ली
मेरी भूमिकाःप्रौद्योगिकी सत्र का प्रमुख वक्तव्य

 

ऑडियो
सुनें: ईबुक्स पर बालेन्दु शर्मा दाधीच का व्याख्यान।
 
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