Balendu Sharma Dadhich
रचनाः बालेन्दु शर्मा दाधीच
तिथिः 20 मार्च 2013
श्रेणीः  अंतरिक्ष
प्रकाशनः प्रभासाक्षी.कॉम
टैगः  प्रकृति

लब्बोलुआबः

स्टीफन हाकिंग ने अन्य ग्रहों के प्राणियों से संपर्क के लिए लालायित न होने की सलाह दी है क्योंकि यह मानव जाति के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। तो क्या धरती एलियन्स के निशाने पर आ सकती है? क्या किसी अंतरग्रहीय युद्ध में इंसानी प्रजाति और इस शानदार ग्रह का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है?

Summary:

Renowned astrophysicist Professor Stephen Hawking believes that it was "perfectly rational" to assume intelligent life exists elsewhere. But he warned that aliens might simply raid Earth for resources, then move on. What does this entail for the human race?
एलियंस पर स्टीफन हाकिंग की आशंका और कुछ प्रतिप्रश्न

- बालेन्दु शर्मा दाधीच

सन 1984 में मेट्रो गोल्डविन मेयर ने पीटर हायम्स के निर्देशन में अन्य ग्रहों के प्राणियों (एलियन्स) पर आधारित एक फिल्म बनाई थी। नाम था− '2010: द इयर वी मेक कॉन्टेक्ट।' फिल्म में बृहस्पति के चंद्रमा 'यूरोपा' के निवासियों और इंसानों के बीच हुए पहले संपर्क की कल्पना की गई थी जो सन 2010 में घटित होना था। लेकिन यह तो फिल्मी कहानी हुई। व्यावहारिक दुनिया में लौटकर देखें तो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में 2010 प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग की इस चेतावनी के लिए याद किया जाएगा कि अन्य ग्रहों के प्राणियों से संपर्क के लिए अधिक लालायित होने की आवश्यकता नहीं है। इंसानों के लिए इसके विनाशकारी नतीजे भी हो सकते हैं।

संयोगवश, '2010' के अंतिम दृश्यों में भी एलियन्स धरती की ओर लगातार यही संदेश प्रसारित करते हैं कि 'तुम बाकी ग्रहों पर भले ही नियंत्रण कर लो, मगर यूरोपा पर आने की कोशिश भूलकर भी मत करना।'

स्टीफन हाकिंग भी कुछ−कुछ यही कहते हैं। फर्क यह है कि वे सिर्फ यूरोपा के संदर्भ में नहीं बल्कि सौर मंडलीय और परा−सौर मंडलीय दुनियाओं के निवासियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। इसके बावजूद, कि दूसरे ग्रहों के प्राणियों की खोज अंतरिक्ष विज्ञान के सबसे रोमांचक पहलुओं में से एक है और हम इंसानों के लिए पुनर्जन्म और स्वर्ग−नरक की ही तरह सर्वािधक कौतूहल वाले विषयों में शामिल है। अंतरिक्ष विज्ञान उन चुनिंदा क्षेत्रों में आता है जिसके अन्वेषण के लिए प्रतिद्वंद्वी राष्ट्र भी साथ आने में संकोच नहीं करते। नासा, सेटी और अन्य अंतरिक्ष संस्थानों ने एलियन्स तक संदेश पहुंचाने या उनसे दोतरफा रेडियो संपर्क कायम करने के लिए कई महत्वाकांक्षी प्रयास किए हैं। चंद्रमा से लेकर मंगल, शुक्र, बृहस्पति, शनि, बुध, यूरेनस, वरुण और यम (प्लूटो) तक के अन्वेषण की अलग−अलग किस्म की परियोजनाएं वैज्ञानिकों ने लांच की हैं। फिर हाल के वर्षों में तो हमारी निगाहें सौर मंडल से बाहर स्थित सितारों तक भी जा पहुंची हैं। तो क्या, जैसा कि स्टीफन हाकिंग संकेत दे रहे हैं, यह सब करके हम अपने ही विनाश को न्यौता दे रहे हैं?

'ब्रीफ हिस्टरी ऑफ टाइम' के विख्यात लेखक और एस्ट्रो−फिजि़क्स से जुड़े विषयों पर विश्व के सर्वािधक प्रामाणिक और अधिकार−सम्पन्न वैज्ञानिक, विश्लेषक और चिंतक स्टीफन हाकिंग की बातों को गंभीरता से न लेने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को झकझोर दिया है और वैश्विक स्तर पर एक आशंकाभरी बहस को भी जन्म दिया है− क्या धरती एलियन्स के निशाने पर आ सकती है? क्या किसी अंतरग्रहीय युद्ध में इंसानी प्रजाति और इस शानदार ग्रह का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है? यदि हां, तो ऐसा कब तक संभव है और क्या हम इसे टाल सकते हैं?

अन्य ग्रहों पर जीवन

डिस्कवरी टीवी चैनल पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों की बेहद चर्चित श्रृंखला में स्टीफन हाकिंग ने मोटे तौर पर दो बातें कही हैं। पहली− अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना वास्तविक है, और दूसरी− एलियन्स से मेलजोल के प्रयास सुखद परिणाम ही लेकर आएं, यह जरूरी नहीं। इस संपर्क का परिणाम लगभग वैसा ही हो सकता है, जैसा क्रिस्टोफर कोलंबस के आने का 'नई दुनिया' (अमेरिका) के मूल निवासियों पर हुआ था। उनका मानना है कि जो एलियन्स धरती पर आएंगे वे असल में अपने ग्रहों पर संसाधनों का इतना अधिक दोहन कर चुके होंगे कि ये ग्रह प्राणियों के रहने योग्य नहीं रह गए होंगे। वे विशाल अंतरिक्षयानों में ही रहने को मजबूर होंगे और रास्ते में जो भी ग्रह आएगा, उसके संसाधनों को निशाना बनाएंगे। उनका बर्ताव दोस्ताना ही हो, यह जरूरी नहीं है।

हाकिंग की चेतावनी के कई कोण हैं। वह उलझन भरे प्रश्न और प्रतिप्रश्न पैदा करती है। हालांकि अभी तक एलियन्स के साथ इंसानों का सीधा संपर्क नहीं हुआ है लेकिन अन्य ग्रहों पर जीवन है, यह बात अनेक वैज्ञानिकों ने मानी है। अधिकांशतरू इस मान्यता का आधार वही दलील है जो हाकिंग ने दी है। अंतरिक्ष में आकाश गंगाओं, सौरमंडलों, ग्रहों आदि की संख्या का कोई अंत नहीं है। खुद हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे हैं। ऐसे में, यह धारणा स्वाभाविक रूप से पैदा होती है कि धरती ऐसा अकेला ग्रह नहीं होगा जहां पर किसी न किसी रूप में जीवन मौजूद है। कार्ल सैगन अन्य ग्रहों पर जीवन को बैक्टीरिया के रूप में देखते हैं। कुछ अन्य वैज्ञानिक मानते हैं कि परग्रहीय प्राणी रेंग कर चलने वाले हो सकते हैं। लेकिन इस अनंत ब्रह्मांड में हमारे जैसे या हमसे बेहतर प्राणियों के अस्तित्व की संभावना (या आशंका) भी उतनी ही मजबूत है। हमारे अपने सौर मंडल में शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि के चंद्रमाओं (यूरोपा, टाइटन आदि) पर जीवन की थोड़ी−बहुत संभावना जाहिर की जाती रही है। अभी कल 30 अप्रैल को ही नासा ने कहा है कि मंगल की सतह का अन्वेषण करने वाले रोवर्स− अपोर्च्यूनिटी और स्पिरटि ने वहां सल्फेट खनिजों का पता लगाया है जो उस ग्रह पर जल की मौजूदगी की ओर संकेत करता है।

डॉ. फ्रेंक ड्रैक के बहुचर्चित समीकरण के आधार पर देखा जाए तो हमारी आकाशगंगा में ही कम से कम दस हजार ग्रहों पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। उधर हबल अंतरिक्षीय दूरबीन के अन्वेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि ब्रह्मांड में करीब 125 अरब आकाशगंगाएं हैं। एक अनुमान के अनुसार, इन आकाशगंगाओं में मौजूद सूर्यों में से दस प्रतिशत के पास भी अपने सौरमंडल विद्यमान हों तो अंतरिक्ष में कम से कम 6.25 गुणा 10 घात 18 सौरमंडल मौजूद होंगे। और अगर इन सौरमंडलों के कुल ग्रहों के एक अरबवें हिस्से पर भी जीवन संभव हुआ तो अंतरिक्ष में 6.25 अरब ग्रहों पर चलते−फिरते प्राणी मौजूद होने चाहिए!

तो फिर हमारा क्या होगा?

स्वाभाविक है, इतने सारे ग्रहों के समूह में बुद्धिमान, सक्षम, सबल, वैज्ञानिक क्षमताओं वाले प्राणियों की मौजूदगी से युक्त ग्रहों की संख्या भी अच्छी खासी होगी। हाकिंग का संकेत साफ है कि यदि हमसे उन्नत प्रजाति वाले प्राणी धरती पर आते हैं तो वे धरती पर तबाही भी मचा सकते हैं। वे हमसे उसी तरह से पेश आ सकते हैं जैसे हम पशु−पक्षियों और अन्य प्राणियों के साथ पेश आते हैं, उन्हें मारने में भी संकोच नहीं करते। बहुत से वैज्ञानिक इस बात से असहमत हैं। वे मानते हैं कि यदि किसी ग्रह पर कोई सभ्यता इतने आधुनिक स्तर तक विकसित हो चुकी है तो वह विध्वंसक किस्म की नहीं हो सकती। स्थायित्व के मौजूदा बिंदु तक पहुंचने के लिए उसने संघर्ष का लंबा इतिहास झेला होगा और अब वह काफी हद तक लोकतांत्रिक और उदार हो चुकी होगी।

सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न सौरमंडलों के बीच हजारों प्रकाशवर्षों की दूरी तय करना आसान नहीं है। फिर बहुत बड़े समूह में, अपने सारे संसाधनों और हथियारों के साथ हमारे ग्रह पर आना और उस पर आधिपत्य जमा लेना भी अव्यावहारिक प्रतीत होता है। यदि किसी ग्रह के प्राणी धरती की ओर कूच करते हैं तो वे ऐसा तभी कर सकते हैं जब उन्होंने हजारों साल पहले ही हमारे ग्रह को संसाधनों का अनुमान लगा लिया हो। यदि आज की धरती उन्हें लुभाती है तो फिर यहां तक पहुंचने में उन्हें भविष्य में हजारों, या लाखों वर्ष लगेंगे। इस संदर्भ में सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्टि्रयल इन्टेलीजेंस' (सेटी) नामक संगठन का उदाहरण देना समीचीन होगा जो पांच दशकों से अंतरिक्ष में संकेत भेजने और अन्य ग्रहों के संभावित प्राणियों के रेडियो संकेत रिसीव करने की कोशिश में जुटा है। उसकी ओर से सन 1974 में भेजा गया प्रसिद्ध 'आरेसिबो मैसेज' हमसे लगभग 25 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एम 13 सितारा समूह को लक्ष्य बनाकर भेजा गया था जो 25 हजार वर्ष बाद ही वहां पहुंच सकेगा। यदि इसका उत्तर भी आया तो उसमें और 25 हजार वर्ष लगेंगे। अलबत्ता, यदि कोई एलियन्स प्रकाश की गति से भी कई गुना तेज गति से यात्रा करने में सक्षम हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता।

एलियन्स से सभ्य और उदार होने की उम्मीद भी सवालों के घेरे में है। 'नेचर' पत्रिका ने अक्तूबर 2006 में लिखा था− यह धारणा बनाने का कोई आधार नहीं है कि अंतरिक्ष में मौजूद सभी परामानवीय सभ्यताएं निष्क्रिय ही होंगी। और उनमें से किसी एक निष्क्रिय सभ्यता के साथ भी इंसानी संपर्क होता है तो वह विध्वंसक न हो, यह जरूरी नहीं। सेटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट पॉल डेविस ने भी तो कुछ कुछ ऐसा ही कहा है। यदि कोई एलियन्स बुद्धिमान और ज्ञानी हैं, तो वे शांतिपूर्ण भी होंगे, यह जरूरी नहीं। हम जिस अंदाज में सोचते हैं, उसी तरह की अपेक्षा एलियन्स से नहीं कर सकते। आखिरकार वे एलियन हैं। जिसे हम शांतिपूर्ण मानते हैं, वह उनकी दृष्टि में हिंसक हो सकता है। हम इंसानी विचारों को उनके दिमाग में नहीं डाल सकते। उनके बारे में किसी भी तरह का अनुमान लगाना बहुत खतरनाक हो सकता है।

लेख का अंत एक और प्रतिप्रश्न से− अगर हम एलियन्स का ध्यान खींचना बंद कर दें तो क्या स्थित बिदल जाएगी? यदि वे विज्ञान और तकनीक की दृष्टि से बहुत आगे जा चुके हैं तो क्या वे पहले ही हमें खोज नहीं चुके होंगे? हमारे अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों के शुरू होने से कुछ सौ या हजार साल पहले? आखिरकार किसी भी ग्रह से कोई संदेश या संकेत न मिलने के बावजूद हम इंसान भी तो उन्हें ढूंढ निकालने पर आमादा हैं!

सचमुच एक अबूझ पहेली है अंतरिक्ष।

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