Balendu Sharma Dadhich
रचनाः बालेन्दु शर्मा दाधीच
तिथिः 19 मार्च 2013
श्रेणीः  फ्री एंड ओपन सोर्स
प्रकाशनः शुक्रवार पत्रिका
टैगः  सॉफ्टवेयर

लब्बोलुआबः

सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज कई दशकों से सॉफ्टवेयर विकसित कर उन्हें मुफ़्त वितरित करने का काम कर रहे हैं। उनका यह मानना है कि तकनीकी साधनों का अभाव या उन्हें खरीदने में अक्षमता किसी व्यक्ति के पढ़ने-लिखने, कामकाज और तरक्की में आड़े नहीं आनी चाहिए।

Summary:

Free And Open Source software has become a strong, worldwide community and movement of some good people who are using their expertise in IT for the public good. I consider myself fortunate to be a part of this community.
मुफ़्त सॉफ्टवेयर के जरिए समाजसेवा में जुटे भले लोग

- बालेन्दु शर्मा दाधीच

लगभग डेढ़ दशक पहले, एक टेलीविजन चैनल में काम करते समय मैं इस बात से व्यथित रहता था कि हिंदी के कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट भी अंग्रेजी में क्यों लिखी जाए। अंग्रेजी मानसिकता के साथ-साथ एक और कारण जो मेरे साथियों को अंग्रेजी में स्क्रिप्ट लिखने के लिए विवश करता था, वह था किसी अच्छे हिंदी शब्द संसाधक का अभाव, जिस पर मैं और मेरे साथी हिंदी में टाइप कर सकें। जो सॉफ्टवेयर उपलब्ध भी थे, उन पर टाइप करना मुश्किल था क्योंकि वे अवैज्ञानिक टाइपिंग पद्धतियों पर आधारित थे। ऊपर से बहुत महंगे।

वह टेलीविजन चैनल छोड़ने के बाद मैंने आईटी के क्षेत्र में पढ़ाई शुरू की तो मेरे मन में यह बात थी कि जब मैं सॉफ्टवेयर विकसित करने की स्थिति में आ जाऊंगा तो सबसे पहले एक हिंदी वर्ड प्रोसेसर का विकास करूँगा और उसे ऐसे सभी लोगों को निःशुल्क उपलब्ध कराऊंगा, जो कंप्यूटर पर हिंदी में काम करना चाहते हैं लेकिन सॉफ्टवेयर सुलभ न होने से ऐसा नहीं कर पाते। इसी तरह मेरे हिंदी शब्द संसाधक (वर्ड प्रोसेसर) 'माध्यम' का जन्म हुआ जिसे मैंने सन 2000 में लोगों के निःशुल्क इस्तेमाल के लिए इंटरनेट पर जारी किया। (डाउनलोड के लिए क्लिक करें) पहले पाँच साल में ही जब उसकी एक लाख प्रतियाँ डाउनलोड हो गईं, तब मैंने और डाउनलोड की गिनती रखना छोड़ दिया। तसल्ली हुई कि एक अच्छा काम पूरा हुआ।

माध्यम को पहली बार इंटरनेट पर डालते समय मुझे इस बात का अहसास नहीं था कि मैं अनायास ही दुनिया भर में फैले 'फ्री एंड ओपन सोर्स समुदाय' का हिस्सा बन गया हूँ। लेकिन 'माध्यम' को जिस तरह आम लोगों ने इस्तेमाल करना शुरू किया और धन्यवाद के मेल आने शुरू हुए, तब अहसास हुआ कि सॉफ्टवेयर को भी समाज सेवा का माध्यम बनाया जा सकता है। मैंने कोई अनोखा काम नहीं किया था।

सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज कई दशकों से यह काम कर रहे थे, जिनका यह मानना है कि तकनीकी साधनों का अभाव या उन्हें खरीदने में अक्षमता किसी व्यक्ति के पढ़ने-लिखने, कामकाज और तरक्की में आड़े नहीं आनी चाहिए। लाइनस टोरवाल्ड्स, लैरी वॉल, ब्रायन बेलेन्डोर्फ, एरिक एलमैन, गुइदो वान रोसम, माइकल तीमैन, पॉल विक्सी, जैमी जाविन्स्की, एरिक रेमंड्स, मैथियास एट्रिच और उनके जैसे कई भले इंसान अपने जीवन के सबसे परिणामदायक हिस्से को फ्री सॉफ्टवेयर मुहैया कराने की मुहिम को समर्पित कर चुके हैं।

भले लोगों का विश्वव्यापी समुदाय

फ्री एंड ओपन सोर्स के नाम से सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का एक विशाल, विश्वव्यापी समुदाय निर्मित हो चुका है। हजारों दक्ष कंप्यूटर प्रोग्रामर और इंजीनियर फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के विकास में जुटे हैं। तमाम तरह के सॉफ्टवेयर उन्होंने बनाए हैं और फिर उन्हें चुपचाप आम लोगों के निःशुल्क इस्तेमाल के लिए इंटरनेट पर डाल दिया है। पूरी तरह मुफ़्त। कहीं कोई अगर-मगर या अंदर से निकल आने वाली मुश्किल सी शर्त नहीं। अपेक्षा है तो बस यह कि आप भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाइए- हम सबके सामूहिक हित में। सॉफ्टवेयर की दुनिया में दिखाई देने वाली यह परिपाटी अद्भुत है। शायद ही कोई और क्षेत्र हो जहाँ लोग महीनों यहाँ तक कि बरसों तक मेहनत करने के बाद बनाए अपने उत्पाद को बिना कोई पैसा लिए अनजान लोगों के हवाले कर देते हों। कौन कहता है हम कलियुग में रहते हैं!

यहाँ कुछ बातें गौर करने की है। इस किस्म के सॉफ्टवेयर विकास में लगे ज्यादातर लोग उच्च शिक्षित हैं, तकनीकी लिहाज से बहुत दक्ष हैं और वे अपनी आजीविका किसी दूसरे काम से अर्जित करते हैं। अधिकांश डवलपर्स के लिए फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर पूर्णकालिक दायित्व नहीं है। वे अपने निजी समय का एक हिस्सा इस पर खर्च करते हैं। इसे आप उनकी हॉबी भी मान सकते हैं और कमिटमेंट भी। जिस समय में आम लोग वक्त गुजारने के लिए टेलीविजन या सिनेमा देखने की सोचते हैं, तब सॉफ्टवेयर विश्व के इन स्वयंसेवकों के मन में जनहित के लिए कोई अच्छा एप्लीकेशन बनाने की इच्छा जागृत होती है।

फ्री या ओपन सोर्स या दोनों

आइए, फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर की अवधारणा को समझने की कोशिश करते हैं। नाम से जाहिर है कि इन सॉफ्टवेयरों की दो श्रेणियाँ हैं- पहली फ्री और दूसरी ओपन सोर्स। फ्री का मतलब साफ है- ऐसा सॉफ्टवेयर जिसकी कोई कीमत नहीं है। न आर्थिक, न किसी और किस्म की। ओपन सोर्स का अर्थ है ऐसा सॉफ्टवेयर, जिसका कोड (तकनीकी भाषा में लिखी इबारतें, जिनके जरिए सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जाता है) सबके उपयोग के लिए सुलभ है। यानी तकनीकी ज्ञान रखने वाला कोई अन्य सॉफ्टवेयर डवलपर भी दूसरों के लिखे कोड का इस्तेमाल अपने सॉफ्टवेयर के निर्माण में कर सकता है।

यह अवधारणा कॉपीराइट के एकदम उलट है। विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, एमएस सिक्वेल सर्वर डेटाबेस, एडोब फोटोशॉप, नॉर्टन एंटी वायरस, इंटरनेट एक्सप्लोरर जैसे कमर्शियल सॉफ्टवेयर प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर की श्रेणी में आते हैं। यानी ऐसे सॉफ्टवेयर, जिन्हें आप इस्तेमाल तो कर सकते हैं लेकिन उनके भीतर की संरचना या सोर्स कोड़ में झांकने की इजाजत नहीं है। दूसरी ओर इन्हीं श्रेणियों में बनाए गए लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम, ओपन ऑफिस, माई एसक्यूएल डेटाबेस, जिम्प, क्लेमविन, नेटस्केप फ्री एंड ओपन सोर्स की श्रेणी में आते हैं। ये सभी न सिर्फ मुफ्त मिलते हैं बल्कि आप इनके भीतर-बाहर भी झाँक सकते हैं और अगर आपको तकनीकी कोड समझ में आती है तो अपनी जरूरतों के लिहाज से इनके फीचर्स में थोड़ा-बहुत बदलाव भी कर सकते हैं।

ऐसे सॉफ्टवेयरों के इस्तेमाल की कुछ शर्तें हैं, हालाँकि इनका उद्देश्य आपको किसी तरह से बांधना या रोकना नहीं बल्कि सॉफ्टवेयरों की मुक्त प्रकृति की रक्षा करना है। ये हैं-

  • ये सॉफ्टवेयर निःशुल्क वितरित किए जाएंगे
  • इनका सोर्स कोड भी मुहैया कराया जाएगा
  • सबको सोर्स कोड में संशोधन करने की आजादी होगी
  • संशोधित प्रारूपों को पुनः वितरित किया जा सकता है
  • इन सॉफ्टवेयरों के इस्तेमाल में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होगी जो किसी दूसरे सॉफ्टवेयर की राह में आड़े आए।

सभी फ्री सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स हों, यह जरूरी नहीं है। जैसे मेरा 'माध्यम हिंदी वर्ड प्रोसेसर।' हालाँकि लगभग सभी ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर फ्री हैं। हो सकता है कि कोई सॉफ्टवेयर डेवलपर अपने सॉफ्टवेयर की कीमत नहीं लेना चाहे, लेकिन उसके पीछे की गई मेहनत को संरक्षित रखना चाहे। वह बड़ी मेहनत और तर्कशक्ति के आधार पर लिखे गए अपने सोर्स कोड को दूसरों यूँ ही बाँट देने को तैयार न हो। ऐसे सॉफ्टवेयर फ्री सॉफ्टवेयर की श्रेणी में तो आते हैं, ओपन सोर्स की श्रेणी में नहीं।

लेकिन जो लोग अपना सोर्स कोड खुले आम जाहिर कर देते हैं वे भी किसी नासमझी में ऐसा नहीं करते। ओपन सोर्स के पीछे एक सामुदायिक भावना है। जब कोई डवलपर अपना सोर्स कोड प्रकट करता है तो समुदाय के दूसरे सदस्य उसमें नए फीचर्स जोड़ सकते हैं और देखते ही देखते छोटे से पैमाने पर शुरू हुआ काम दिग्गज कंपनियों के बनाए सॉफ्टवेयरों को टक्कर दे सकता है।

ऐसा हो भी रहा है। आज सर्वर सॉफ्टवेयरों के मामले में लिनक्स को विंडोज पर भारी समझा जाता है और माई एसक्यूएल (MySQL) किसी भी मायने में ओरेकल, डीबी-2 या एमएस एसक्यूएल से कम नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट की स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज सी-शार्प अगर दमदार है तो ओपन सोर्स के तहत विकसित पीएचपी भी कोई कम नहीं है।

अगर आप ठान लें कि आपको कोई कॉमर्शियल सॉफ्टवेयर इस्तेमाल नहीं करना तो आपका लगभग पूरा काम फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के जरिए संभव है। भले ही वह दफ़्तर का रोजमर्रा का काम हो या विशेषज्ञतापूर्ण तकनीकी काम जैसे सॉफ्टवेयर डवलपमेंट और वेब डवलपमेंट। मिसाल के तौर वेब डवलपमेंट और होस्टिंग में इस्तेमाल होने वाले चार अहम सॉफ्टवेयरों का समूह, जिसे लैम्प (Linux, Apache, MySQL, PHP) कहा जाता है, वह फ्री एंड ओपन सोर्स श्रेणी में उपलब्ध है। सी, जावा और पर्ल नामक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (जिसे गूगल ने प्रचुरता से इस्तेमाल किया है), तथा पीएनजी जैसा इमेज फॉरमैट भी इस श्रेणी में आता है।

ये सब किसी भी मायने में कॉमर्शियल सॉफ्टवेयरों से कमजोर नहीं है, बल्कि लिनक्स के समर्थकों का दावा है कि यह उनसे ज्यादा तेज और शक्तिशाली है। संयुक्त राष्ट्र के कई घटकों में फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयरों का प्रचुरता से इस्तेमाल किया जाता है।

आजमाएँ कुछ अच्छे फ्री सोर्स सॉफ्टवेयर

ओपन ऑफिस: ओपन ऑफिस.ऑर्ग वे सभी कार्य कर सकता है जो माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस करता है। मसलन− वर्ड प्रोसेसिंग, प्रेजेन्टेशन, स्प्रैडशीट आदि। इसमें माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस की फाइलें भी खोली जा सकती हैं। यह http://www.openoffice.org पर निःशुल्क उपलब्ध है।

पिडगिनः यह कमाल का इन्स्टैंट मैसेन्जर है जो न सिर्फ 'पिडगिन' बल्कि याहू मैसेन्जर, गूगल टॉक, माईस्पेस आईएम, एमएसएन मैसेन्जर, जैबर और आईसीक्यू का प्रयोग करने वाले यूज़र्स से भी चैट की सुविधा देता है। मैसेन्जर के जरिए कॉन्फरेन्सिंग करने के लिए भी बहुत अच्छा है। यहाँ मिलेगा− http://gaim.sourceforge.net

क्लैम विनः एंटी−वायरस सॉफ्टवेयर खरीदने के नाम पर ज्यादातर लोग बगलें झांकने लगते हैं। लेकिन 'क्लैम विन' आपको महंगा नहीं लगेगा क्योंकि यह है बिल्कुल फ्री। डाउनलोड का पता है− http://www.clamwin.com

कीपास पासवर्ड सेफः अगर आप अलग-अलग साइट पर अलग-अलग पासवर्ड डालने और उन्हें याद रखने से आजिज आ चुके हैं 'कीपास' की शरण लीजिए। इसे अपने पासवर्ड बताइए और याद रखने की उलझन से मुक्त हो जाइए। वह हर वेब पेज पर खुद पासवर्ड भरता रहेगा, बिना उन्हें जाहिर किए। यह पासवर्ड मैनेजर यहां मिलेगा− http://keepass.sourceforge.net

सीडी बर्नर एक्सपीः अपनी फाइलों को सीडी-डीवीडी पर सहेजने के इच्छुक लोग 'सीडी बर्नर एक्सपी' को आजमाएँ। यह फ्री तो है ही, सीडी और डीवीडी के साथ−साथ ब्लू रे और एचडी (हाई डेफीनिशन) फॉरमैट की डिस्क को भी ‘बर्न’ कर सकता है। यहां से हासिल कीजिए− http://www.cdburnerxp.se

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