Balendu Sharma Dadhich
रचनाः बालेन्दु शर्मा दाधीच
तिथिः 19 मार्च 2013
श्रेणीः  साइबर वार
प्रकाशनः शुक्रवार पत्रिका
टैगः  चीन

लब्बोलुआबः

पूरी दुनिया चीन के साइबर आचरण से त्रस्त है। हुए साइबर हमले चीन के चेंगदू शहर से किए गए थे। टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पता लगाया था कि 2011 में भारतीय ठिकानों पर हुए साइबर हमले चीन के चेंगदू शहर से किए गए थे। और इस साल अगस्त में मैकेफी ने भारत तथा 72 दूसरे ठिकानों की हैकिंग के बारे में जो रपट पेश की है वह भी चीन को ही हमलावर करार देती है।

Summary:

Investigations and studies have shown that most cyber attacks targetting USA, Europe and India take place from the Chinese soil. Reports say an army of a few thousand Chinese youths is engaged in targetting countries who are considered as a potential threat to Chinese interests.
साइबर स्मार्ट चीनः इंटरनेट विश्व का बेताज खलनायक

- बालेन्दु शर्मा दाधीच

जुलाई 2010 में भारतीय उपग्रह इनसैट 4बी पर ‘स्टक्सनेट’ वायरस के हमले ने भारत सरकार को जैसे सोते में जगाया है। इस उपग्रह में इस वायरस को पहुँचाने का मकसद यह था कि उसके जरिए अपने कार्यक्रमों का प्रसारण करने वाले टेलीविजन चैनलों की प्रसारण व्यवस्था गड़बड़ा जाए। वही हुआ भी। बताया जाता है कि इसके पीछे विशुद्ध व्यावसायिक कारण थे, जिनकी उत्पत्ति चीन से हुई।

भारतीय उपग्रह की सेवाएँ गड़बड़ातीं तो चीनी उपग्रह संचालित करने वाली कंपनी को नए भारतीय ग्राहक मिलते। इस घटना ने सरकार को इस बात का अहसास कराया कि खुदा न ख्वास्ता इसी तरह के हमले भारत की दूरसंचार प्रणाली के केंद्र पर कर दिए जाएं तो? या फिर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, रिजर्व बैंक, सभी बैंकों की ऑनलाइन बैंकिंग प्रणालियों, मीडिया के संचार तंत्र, इंटरनेट, विमानन सिस्टम, रिफाइनरियों, ट्रैफिक कंट्रोल आदि को ठप कर दिया जाए तो? सब कुछ रुक हो जाएगा, अफरा-तफरी, अराजकता तथा दहशत फैल जाएगी और बाहरी ताकतों के लिए मैदान साफ हो जाएगा! क्या वह गतिविधि किसी जंग से कम होगी?

जिस स्टक्सनेट वायरस का इस्तेमाल भारत पर साइबर हमले करने के लिए किया गया, उसी ने पिछले साल ईरान के एक परमाणु संयंत्र को बंद करने पर मजबूर कर दिया था। सन 2007 में एस्तोनिया पर हुए साइबर हमलों ने वहां की सरकार, बैंकों, सुरक्षा प्रणालियों, अखबारों, संसद और मंत्रालयों को पंगु बना दिया था। वहाँ सामान्य व्यवस्था बहाल होने में कई दिन लगे। अरबों का नुकसान अलग से।

आज पूरी दुनिया चीन के साइबर आचरण से त्रस्त हैं, जो इंटरनेट विश्व का बेताज खलनायक माना जाता है। व्हाइट हाउस से लेकर नाटो तक और ब्रिटिश गुप्तचर एजेंसी से लेकर आस्ट्रेलियाई संसद तक चीन से होने वाले हमलों के शिकार हो चुके हैं। साइबर हमलों की निगरानी रखने वाले टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पता लगाया था कि 2011 में भारतीय ठिकानों पर हुए साइबर हमले चीन के चेंगदू शहर से किए गए थे। और इस साल अगस्त में मैकेफी ने भारत तथा 72 दूसरे ठिकानों की हैकिंग के बारे में जो रपट पेश की है वह भी चीन को ही हमलावर करार देती है। रपट के अनुसार इसके पीछे कम से कम एक सरकारी संगठन की भी भूमिका है।

हालाँकि चीन इससे इंकार करता है। उसका तो यह भी दावा है कि अमेरिका और भारत से खुद चीन के विरुद्ध पिछले एक साल में करीब पांच लाख साइबर हमले हुए हैं और उसे निशाना बनाने के मामलों में से आठ फीसदी भारत की सरजमीन से जन्म लेते हैं। लेकिन कुछ अरसा पहले चीन के झूठ का उसी के सरकारी टेलीविजन पर पर्दाफाश हो गया जब एक कार्यक्रम में कुछ सैकंड की ऐसी क्लिप दिखा दी गई जिसमें चीनी सेना की देखरेख में होने वाली हैकिंग की कार्रवाइयों की एक झलक दिखा दी गई थी। बाद में यह वीडियो तुरत-फुरत हटा दिया गया। हैकिंग के मामलों की जांच करने वाले अनेक विशेषज्ञों ने पाया है कि सरकारों को निशाना बनाने वाले वायरसों और इंटरनेट हमलों का कोड चीनी भाषा में लिखा गया है। हमला करने वाले कंप्यूटरों के आईपी एड्रेस (इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों की पहचान बताने वाला एक नंबर) भी चीन से जुड़े थे। और फिर जिन देशों को निशाना बनाया गया, वे वही थे जिनके प्रति चीन का रवैया शत्रुतापूर्ण है, जैसे भारत, अमेरिका, जापान, वियतनाम आदि।

छोटी नहीं है साइबर चुनौती

कैस्परस्काई लैब ने रहस्योद्घाटन किया है कि भारत में कुख्यात फ्लेम वायरस का प्रकोप हुआ है। यह वायरस पिछले दो सालों से बहुत सी सरकारों का गोपनीय डेटा चुरा रहा है। जिस कंप्यूटर में यह घुस जाता है, उससे संवेदनशील डेटा तो अपने नियंत्रकों को भेजता ही है, साथ ही साथ ब्लूटूथ के जरिए उन कंप्यूटरों को हैकरों की पहुँच में ला देता है। यानी वे जो सामग्री चाहें, दूर से ही डाउनलोड कर लें।

नवंबर 2011: नेशनल इन्फॉरमेटिक्स सेन्टर (एनआईसी) के कुछ सर्वरों पर दूसरे देशों के हैकरों ने कब्जा जमा रखा था और वे इनका इस्तेमाल तीसरे देशों के विरुद्ध साइबर हमलों के लिए कर रहे थे।

जुलाई 2011: चीनी हैकरों ने केंद्र सरकार के कंप्यूटरों को नियंत्रित करके रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और दलाई लामा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं को खंगाल डाला था।

जुलाई 2011: विदेश मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के कंप्यूटरों को हैक कर लिया गया। पता चला कि हैक किए गए कुछ कंप्यूटर तो पिछले दो साल से गुप्त सूचनाएं बाहर भेज रहे थे।

जून 2011: दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के आधुनिकतम टर्मिनल 3 को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा क्योंकि उसकी तकनीकी प्रणालियों में खराबी आ गई थी। आशंका है कि यह एक साइबर हमले के कारण हुआ।

जुलाई 2010: इनसैट 4बी को स्टक्सनेट वायरस के जरिए नुकसान पहुँचाया गया था ताकि उसके जरिए चलने वाले टेलीविजन चैनल चीनी उपग्रह के ट्रांसपोंडर किराए पर ले लें।

अप्रैल 2010: रक्षा मंत्रालय और कई भारतीय दूतावासों के कंप्यूटर सिस्टम हैक कर लिए गए।

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