Balendu Sharma Dadhich
रचनाः बालेन्दु शर्मा दाधीच
तिथिः 19 मार्च 2013
श्रेणीः  वर्ल्ड वाइड वेब
प्रकाशनः अमर उजाला
टैगः  सोशल नेटवर्किंग

लब्बोलुआबः

वर्ल्ड वाइड वेब के जनक सर टिम बर्नर्स ली के इस कथन को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है कि फेसबुक, लिंक्डइन और फ्रेंडस्टर जैसी बेहद सफल वेबसाइटों का प्रोपराइटरी ढांचा उन सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है जो वेब के संस्थापकों ने तय किए थे।

Summary:

The inventor of World Wide Web, Sir Tim Berners Lee believes that websites such as Facebook, Linked-In and even Google and Apple are forcing people to use their proprietory tools to access Internet based services which is against the very nature of world wide web being a free and open platform.
क्या वेब की मुक्त प्रकृति के खिलाफ है फेसबुक-लिंक्ड इन?

- बालेन्दु शर्मा दाधीच

सर टिम बर्नर्स ली न सिर्फ वर्ल्ड वाइड वेब के जनक हैं बल्कि वे उस पर सबका बराबरी का हक़ मानते हैं और वेब का लोकतांत्रिक स्वरूप बरकरार रखने के लिए अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं। उनके विज़न के अनुसार वेब एक खुला माध्यम है- सबका, सबके लिए और सबके द्वारा।

फेसबुक, लिंक्डइन और फ्रेंडस्टर जैसी बेहद सफल वेबसाइटों का प्रोपराइटरी ढांचा उन सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है जो वेब के संस्थापकों ने तय किए थे। आजकल इनकी आलोचना इस बात के लिए अधिक हो रही है कि वे सामाजिकता का ही दम भरती हैं मगर लोगों को सामाजिकता से ही दूर कर रही हैं। लोग वर्चुअल मित्रों की संख्या बढ़ाने में जुटे हैं, और दिन-रात सोशियल नेटवर्किंग साइटों पर बिताते हुए वे वास्तविक मित्रों, रिश्तेदारों और समाज से दूर होते जा रहे हैं। टूटे संपर्क जोड़ने में इन साइटों की उपयोगिता असंदिग्ध है। उन्होंने वेब को दिलचस्प, रोमांचक और सजीव बनाया है। लेकिन दूसरी तरफ वे अपने यूज़र्स की निजता, सुरक्षा, नैतिकता, रचनात्मकता और उत्पादकता को भी प्रभावित कर रही हैं।

सर टम बर्नर्स ली दूरगामी महत्व की बात कर रहे हैं। ये सभी साइटें अपनी सामग्री को एक अभेद्य आवरण में बंद रखती हैं, यानी उसका इस्तेमाल दूसरे वेब एप्लीकेशंस, सॉफ्टवेयरों, वेबसाइटों आदि पर करना अपेक्षाकृत मुश्किल है। हालांकि ये मुक्त प्रकृति के यूज़र जेनरेटेड डेटा के जरिए ही समृद्ध हुई हैं लेकिन उसे मुक्त बनाए रखने को तैयार नहीं हैं। यह डेटा उन्हीं लोगों को दिखेगा जो इनके सदस्य हैं। यह 'बंद' प्रकृति वर्ल्ड वाइड वेब की 'खुली' अवधारणा के उलट है। विकीपीडिया, ब्लॉग और यू-ट्यूब अपेक्षाकृत खुले माध्यम हैं। उनकी सामग्री सवर्सुलभ है और आरएसएस तथा एटम जैसी फीड्स ने दूसरे एप्लीकेशंस में उसका प्रयोग और भी आसान बनाया है।

फिलहाल हम वेब पर सामग्री के नेटवर्क को लिंक्स के नेटवर्क के रूप में जानते हैं। सर ली के विज़न के अनुसार, अगले चरण में वेब पर रखा डेटा भी एक-दूसरे के साथ लिंक किया जा सकेगा। सीमेंटिक वेब जैसी महत्वाकांक्षी तथा क्रांतिकारी तकनीकें इसी से आगे बढ़ेंगी। बहरहाल, प्रोप्राइटरी किस्म की तथा बंद वेबसाइटें यूज़र्स को खींचती रहीं तो वेब के स्वाभाविक विकास तथा लोकतांत्रिक स्वरूप को नुकसान पहुंचेगा।

तकनीकी तेवर
पिछले आलेखः
फ़ेसबुक पर लाइक करें